Monday, 7 November 2011

तेज लहरों पर लिखी मेरी इबारत

तेज लहरों पर लिखी मेरी गज़ल
अब नहीं तुमसे मिटाई जाएगी
रेत मेरी ज़िन्दगी की ऐ हवा !
अब नहीं तुमसे उड़ाई जाएगी |
गीत हैं मेरे नहीं कोई शग़ल
चोट अंगारों की है मेरी गज़ल
हर किसी से ये ना  गाई जाएगी |
हैं छुपी इसमें कई परछाइयाँ
और कुछ मासूम सी तन्हाइयाँ
जो नहीं तुमसे रुलाई जाएँगी |
दीप बनकर दर्द जब जल जाएगा
ये अँधेरा सर्द सा ढल जाएगा
रोशनी ना ये छुपाई जाएगी |
हम समंदर में पले हैं इस तरह
और थपेड़े भी सहे हैं बेतरह 
ये निशानी ना दिखाई जाएगी | 




2 comments:

  1. अच्छी गजल है नीलम जी। बधाई...

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